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गलत समझ बैठे


नही की कोई गलती फिर भी  गलत समझ बैठे

बिना बात के ही वो हमसे जाने क्यों उलझ बैठे

क्या बात थी जो होने लगे सुर्ख़ लाल, ज़र्द साँ

हम ना तो ख़्वाबों में ना ख़्यालों में कभी किसी के करीब बैठे


©® प्रेमयाद कुमार नवीन
जिला - महासमुन्द (छह

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1 Comments

Gunjan Kamal

10-Apr-2022 12:20 PM

शानदार प्रस्तुति 👌

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